श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  6.59.78 
स तान् वृक्षान् समासाद्य प्रतिचिच्छेद रावण:।
अभ्यवर्षच्च घोरेण शरवर्षेण पावकिम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
रावण ने अपने रास्ते में आने वाले सभी पेड़ों को काट डाला और अग्निपुत्र नील पर बाणों की भयंकर वर्षा की।
 
Ravana cut down all the trees that came his way and showered a fierce shower of arrows on Neel, the son of Agni.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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