| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना » श्लोक 73-74 |
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| | | | श्लोक 6.59.73-74  | हनूमानपि तेजस्वी समाश्वस्तो महामना:।
विप्रेक्षमाणो युद्धेप्सु: सरोषमिदमब्रवीत्॥ ७३॥
नीलेन सह संयुक्तं रावणं राक्षसेश्वरम्।
अन्येन युध्यमानस्य न युक्तमभिधावनम्॥ ७४॥ | | | | | | अनुवाद | | इसी बीच महाबली हनुमान जी भी संयत हो गए और पुनः युद्ध की इच्छा से रावण की ओर देखने लगे। उस समय राक्षसराज रावण नील से उलझा हुआ था। हनुमान जी ने क्रोधित होकर उससे कहा - 'हे राक्षसराज! इस समय तू किसी और से युद्ध कर रहा है, अतः मेरा अभी तुझ पर आक्रमण करना उचित नहीं होगा।' | | | | Meanwhile, the illustrious and great Hanuman ji also regained his composure and again started looking at Ravana with the desire to fight. At that time, the demon king Ravana was entangled with Neel. Hanuman ji said to him angrily - 'O demon! At this time you are fighting with someone else, hence it will not be right for me to attack you now'. | | ✨ ai-generated | | |
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