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ramayan 6.59.67-68: हनुमान के शब्दों से रावण क्रोधित हो गया। उसकी आँखें लाल हो गईं। उस महाबली राक्षस ने बड़ी मेहनत से अपनी दाहिनी मुट्ठी उठाई और हनुमान की छाती पर ज़ोर से वार किया। 67-68   |   ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 67-68
 
 
श्लोक  6.59.67-68 
ततो मारुतिवाक्येन कोपस्तस्य प्रजज्वले॥ ६७॥
संरक्तनयनो यत्नान्मुष्टिमावृत्य दक्षिणम्।
पातयामास वेगेन वानरोरसि वीर्यवान्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
हनुमान के शब्दों से रावण क्रोधित हो गया। उसकी आँखें लाल हो गईं। उस महाबली राक्षस ने बड़ी मेहनत से अपनी दाहिनी मुट्ठी उठाई और हनुमान की छाती पर ज़ोर से वार किया। 67-68
 
Hanuman's words infuriated Ravana. His eyes turned red. With great effort, that mighty demon raised his right fist and attacked Hanuman's chest with great force. 67-68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)