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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना
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श्लोक 58
श्लोक
6.59.58
क्षिप्रं प्रहर नि:शङ्कं स्थिरां कीर्तिमवाप्नुहि।
ततस्त्वां ज्ञातविक्रान्तं नाशयिष्यामि वानर॥ ५८॥
अनुवाद
वानर! निःसंदेह मुझ पर आक्रमण करो और चिरस्थायी यश प्राप्त करो। मैं तुम्हारा विनाश तभी करूँगा जब मुझे पता चलेगा कि तुममें कितना पराक्रम है।'
Monkey! Attack me without any doubt and gain permanent fame. I will destroy you only after knowing how much valour you possess.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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