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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना
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श्लोक 57
श्लोक
6.59.57
श्रुत्वा हनूमतो वाक्यं रावणो भीमविक्रम:।
संरक्तनयन: क्रोधादिदं वचनमब्रवीत्॥ ५७॥
अनुवाद
हनुमानजी के ये वचन सुनकर भयंकर बलशाली रावण की आँखें क्रोध से लाल हो गईं और वह क्रोधित होकर बोला-॥57॥
On hearing these words of Hanumanji, the eyes of the terrifyingly powerful Ravana became red with anger and he said angrily -॥ 57॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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