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ramayan 6.59.55: निश्चर! तुम्हें देवता, दानव, गन्धर्व, यक्ष और राक्षस तीनों से न मारे जाने का वरदान प्राप्त है; किन्तु तुम वानरों से डरते हो।   |   ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.59.55 
देवदानवगन्धर्वैर्यक्षैश्च सह राक्षसै:।
अवध्यत्वं त्वया प्राप्तं वानरेभ्यस्तु ते भयम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
निश्चर! तुम्हें देवता, दानव, गन्धर्व, यक्ष और राक्षस तीनों से न मारे जाने का वरदान प्राप्त है; किन्तु तुम वानरों से डरते हो।
 
Nishchar! You have obtained the boon of not being killed by the gods, demons, Gandharvas, Yakshas and Rakshasas; but you are afraid of the monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)