श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.59.51 
राघवस्य वच: श्रुत्वा सम्परिष्वज्य पूज्य च।
अभिवाद्य च रामाय ययौ सौमित्रिराहवे॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण ने उन्हें गले लगा लिया और श्री रामजी को प्रणाम करके युद्ध के लिए चल पड़े।
 
On hearing these words from Sri Raghunath, Sumitra's son Lakshman embraced him and after worshipping and saluting Sri Rama, he set out for the battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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