श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.59.50 
तस्यच्छिद्राणि मार्गस्व स्वच्छिद्राणि च लक्षय।
चक्षुषा धनुषाऽऽत्मानं गोपायस्व समाहित:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में रावण की दुर्बलताओं पर ध्यान दो। उसकी दुर्बलताओं से लाभ उठाओ और अपनी दुर्बलताओं पर भी दृष्टि रखो (कहीं शत्रु उनका लाभ न उठा ले)। एकाग्रचित्त होकर पूर्ण सावधानी के साथ नेत्रों और धनुष से अपनी रक्षा करो।॥50॥
 
You should look for Ravan's weaknesses in the war. Take advantage of his weaknesses and also keep an eye on your weaknesses (lest the enemy takes advantage of them). Be focused and with full caution, defend yourself with your eyes and bow.'॥ 50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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