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ramayan 6.59.5: अब मैं बिना कुछ सोचे ही शत्रुओं का विनाश करने और अपनी विजय के लिए स्वयं उस अद्भुत संग्राम के मुख पर जाऊँगा॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.59.5 
सोऽहं रिपुविनाशाय विजयायाविचारयन्।
स्वयमेव गमिष्यामि रणशीर्षं तदद्भुतम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अब मैं बिना कुछ सोचे ही शत्रुओं का विनाश करने और अपनी विजय के लिए स्वयं उस अद्भुत संग्राम के मुख पर जाऊँगा॥5॥
 
Now, without any thought, I shall go myself to the mouth of that wonderful battle for the destruction of the enemies and my own victory. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)