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ramayan 6.59.47: आर्य! इस दुष्टात्मा को मारने के लिए मैं ही पर्याप्त हूँ। हे प्रभु! मुझे आज्ञा दीजिए। मैं इसका नाश करूँगा।॥47॥   |   ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.59.47 
काममार्य सुपर्याप्तो वधायास्य दुरात्मन:।
विधमिष्याम्यहं चैतमनुजानीहि मां विभो॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
आर्य! इस दुष्टात्मा को मारने के लिए मैं ही पर्याप्त हूँ। हे प्रभु! मुझे आज्ञा दीजिए। मैं इसका नाश करूँगा।॥47॥
 
Arya! I alone am enough to kill this evil soul. Lord! Please give me orders. I will destroy him.'॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)