श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  6.59.45-46 
शाखामृगा रावणसायकार्ता
जग्मु: शरण्यं शरणं स्म रामम्॥ ४५॥
ततो महात्मा स धनुर्धनुष्मा-
नादाय राम: सहसा जगाम।
तं लक्ष्मण: प्राञ्जलिरभ्युपेत्य
उवाच रामं परमार्थयुक्तम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
रावण के बाणों से व्याकुल होकर बहुत से वानर शरणागतों पर दया करने वाले भगवान् राम के पास गए। तब अचानक ही महाधनुर्धर भगवान् राम धनुष लेकर आगे आए। उसी समय लक्ष्मण उनके समक्ष आए और हाथ जोड़कर उनसे ये सत्य वचन कहे -॥45-46॥
 
Many monkeys, troubled by Ravan's arrows, went to Lord Rama, who is kind to those who seek refuge. Then suddenly the great archer, Lord Rama, came forward with his bow. At the same time, Lakshmana came before him and with folded hands told him these true words -॥ 45-46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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