| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना » श्लोक 42 |
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| | | | श्लोक 6.59.42  | ततो गवाक्षो गवय: सुषेण-
स्त्वथर्षभो ज्योतिमुखो नलश्च।
शैलान् समुत्पाटॺ विवृद्धकाया:
प्रदुद्रुवुस्तं प्रति राक्षसेन्द्रम्॥ ४२॥ | | | | | | अनुवाद | | तब गवाक्ष, गवय, सुषेण, ऋषभ, ज्योतिर्मुख और नल - इन विशाल वानरों ने पर्वत शिखरों को उखाड़ फेंका और राक्षस राजा रावण पर हमला कर दिया। | | | | Then Gavaksh, Gavaya, Sushen, Rishabh, Jyotirmukha and Nala - these giant monkeys uprooted the mountain peaks and attacked the demon king Ravana. | | ✨ ai-generated | | |
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