Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.59.40: रावण के हाथ से छूटकर वह मानस इन्द्र के वज्र के समान तेजस्वी शरीर वाला सुग्रीव के पास पहुँचा और उसे उसी प्रकार घायल कर दिया, जैसे भगवान कार्तिकेय की भयंकर शक्ति ने क्रौंच पर्वत को छिन्न-भिन्न कर दिया था ॥40॥   |   ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.59.40 
स सायको रावणबाहुमुक्त:
शक्राशनिप्रख्यवपु:प्रकाशम्।
सुग्रीवमासाद्य बिभेद वेगाद्
गुहेरिता क्रौञ्चमिवोग्रशक्ति:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
रावण के हाथ से छूटकर वह मानस इन्द्र के वज्र के समान तेजस्वी शरीर वाला सुग्रीव के पास पहुँचा और उसे उसी प्रकार घायल कर दिया, जैसे भगवान कार्तिकेय की भयंकर शक्ति ने क्रौंच पर्वत को छिन्न-भिन्न कर दिया था ॥40॥
 
Having escaped from Ravana's hands, that Psyche, like Indra's thunderbolt, reached Sugriva with a body as radiant as the thunderbolt and injured him as quickly as the terrible power wielded by Lord Kartikeya had disintegrated Mount Krauncha. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)