श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.59.4 
नावज्ञा रिपवे कार्या यैरिन्द्रबलसादन:।
सूदित: सैन्यपालो मे सानुयात्र: सकुञ्जर:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को तुच्छ समझकर उनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। जिन शत्रुओं को मैं बहुत छोटा समझता था, उन्होंने मेरे सेनापति को उसके सेवकों और हाथियों सहित मार डाला, जो इन्द्र की सेना को भी नष्ट करने में समर्थ थे।॥4॥
 
‘Enemies should not be ignored considering them insignificant. Those enemies whom I considered very small, killed my commander along with his servants and elephants, who was capable of destroying even Indra's army.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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