श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.59.39 
स तं गृहीत्वानिलतुल्यवेगं
सविस्फुलिङ्गज्वलनप्रकाशम्।
बाणं महेन्द्राशनितुल्यवेगं
चिक्षेप सुग्रीववधाय रुष्ट:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उस बाण का वेग वायु के समान था। उससे चिंगारियाँ निकलती थीं और धधकती आग की तरह प्रकाश फैल जाता था। क्रोधित रावण ने सुग्रीव को मारने के लिए इंद्र के वज्र के समान भयंकर वेग से उस बाण को छोड़ा।
 
The speed of that arrow was like that of the wind. It emitted sparks and spread light like a blazing fire. Ravana, enraged, shot that arrow with a speed as terrifying as Indra's thunderbolt to kill Sugreeva.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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