श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.59.37 
तच्छैलशृङ्गं बहुवृक्षसानुं
प्रगृह्य चिक्षेप निशाचराय।
तमापतन्तं सहसा समीक्ष्य
चिच्छेद बाणैस्तपनीयपुङ्खै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव ने अनेक वृक्षों और शिखरों से युक्त वह विशाल शिला शिखर रावण पर फेंका। उस शिखर को अपनी ओर आते देख रावण ने सहसा स्वर्ण पंखयुक्त अनेक बाण चलाकर उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Sugreeva threw that huge rock peak with many trees and peaks at Ravana. Seeing that peak coming towards him, Ravana suddenly shot many arrows with golden feathers and broke it into pieces.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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