श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.59.35 
विसर्जयित्वा सचिवांस्ततस्तान्
गतेषु रक्ष:सु यथानियोगम्।
व्यदारयद् वानरसागरौघं
महाझष: पूर्णमिवार्णवौघम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जब उसने अपने मंत्रियों को विदा कर दिया और राक्षसगण उसकी आज्ञा के अनुसार अपने-अपने स्थान पर चले गए, तब रावण ने समुद्ररूपी वानर सेना को उसी प्रकार विदीर्ण करना आरम्भ कर दिया, जैसे कोई बड़ी मछली (तिमिंगिल) सम्पूर्ण समुद्र को क्षुब्ध कर देती है।
 
When he had thus sent his ministers away and the demons had gone to their respective places according to his orders, then Ravana began to tear apart the ocean-like monkey army, just as a great fish (Timingil) disturbs the entire ocean.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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