श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.59.33 
तत: स रक्षोधिपतिर्महात्मा
रक्षांसि तान्याह महाबलानि।
द्वारेषु चर्यागृहगोपुरेषु
सुनिर्वृतास्तिष्ठत निर्विशङ्का:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महामनस्वी राक्षसराज रावण ने अपने साथ आये हुए महाबली राक्षसों से कहा, 'तुम सब लोग नगर के द्वारों पर तथा राजमार्ग पर स्थित घरों के दरवाजों पर निर्भयतापूर्वक तथा प्रसन्नतापूर्वक खड़े रहो।
 
Thereafter the great-minded demon king Ravana said to the mighty demons who had accompanied him, 'You all should stand fearlessly and happily on the doors of the city gates and the doors of the houses on the highway.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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