श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.59.30 
विभाति रक्षोराजोऽसौ प्रदीप्तैर्भीमदर्शनै:।
भूतै: परिवृतस्तीक्ष्णैर्देहवद्भिरिवान्तक:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो तेजस्वी, भयंकर रूप वाले और तीखे क्रोध वाले हैं, उन राक्षसों से घिरा हुआ यह राक्षसराज रावण, देहधारी भूतों से घिरे हुए यमराज के समान प्रतीत होता है॥30॥
 
Surrounded by those demons who are radiant, fearsome in appearance and have a sharp temper, this demon king Ravana appears like Yamaraja surrounded by embodied ghosts.॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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