श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.59.3 
संख्ये प्रहस्तं निहतं निशम्य
क्रोधार्दित: शोकपरीतचेता:।
उवाच तान् राक्षसयूथमुख्या-
निन्द्रो यथा निर्जरयूथमुख्यान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'युद्धभूमि में प्रहस्त मारा गया' यह सुनकर वे अत्यन्त क्रोधित हुए; किन्तु शीघ्र ही उनका मन उसके लिए शोक से भर गया। अतः जैसे इन्द्र प्रमुख देवताओं से बातें करते हैं, वैसे ही वे दैत्य सेना के प्रधान सरदारों से बोले -॥3॥
 
On hearing that 'Prahasta was killed on the battlefield', he became very angry; but soon his mind was filled with grief for him. So, like Indra who talks to the chief gods, he spoke to the chief officers of the demon army -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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