श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.59.19 
यश्चैष शूलं निशितं प्रगृह्य
विद्युत्प्रभं किंकरवज्रवेगम्।
वृषेन्द्रमास्थाय शशिप्रकाश-
मायाति योऽसौ त्रिशिरा यशस्वी॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो वज्र के समान तेज को भी वश में कर लेते हैं और जिनसे बिजली के समान तेज निकलता है, जो हाथ में तीक्ष्ण त्रिशूल धारण करते हैं, तथा चन्द्रमा के समान श्वेत कांति वाले वृषभ पर सवार हैं, वे महाबली योद्धा त्रिशिरा हैं॥19॥
 
The one who has enslaved even the force of the thunderbolt and from whom radiance like that of lightning emanates, holding in his hand a sharp trident, riding on a bull of moon-like white radiance, is the glorious warrior Trishira*.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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