श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.59.17 
योऽसौ नवार्कोदितताम्रचक्षु-
रारुह्य घण्टानिनदप्रणादम्।
गजं खरं गर्जति वै महात्मा
महोदरो नाम स एष वीर:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिनके नेत्र प्रातःकाल उगते हुए सूर्य के समान लाल हैं और जिनकी वाणी घंटे की ध्वनि से भी ऊँची है, जो ऐसे भयंकर हाथी पर सवार होकर जोर से गर्जना कर रहे हैं, वे वीर महोदर के नाम से प्रसिद्ध हैं॥17॥
 
The one whose eyes are as red as the rising sun in the morning and whose voice is louder than the sound of a bell, who is roaring loudly while riding on such a ferocious elephant, is famous by the name of Veer Mahodar.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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