श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.59.16 
यश्चैष विन्ध्यास्तमहेन्द्रकल्पो
धन्वी रथस्थोऽतिरथोऽतिवीर:।
विस्फारयंश्चापमतुल्यमानं
नाम्नातिकायोऽतिविवृद्धकाय:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो विन्ध्याचल, अस्ताचल और महेन्द्रगिरि के समान विशाल है, अत्यंत वीर है और धनुष धारण किए हुए रथ पर बैठा हुआ है तथा बार-बार अपने अतुलनीय धनुष को खींच रहा है, उसका नाम अतिकाय है। उसका शरीर बहुत बड़ा है॥16॥
 
The one who is as huge as Vindhyachal, Astachal and Mahendragiri, is extremely brave and is sitting on a chariot with a bow and is repeatedly pulling his matchless bow, his name is Atikaya. His body is very big.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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