| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना » श्लोक 146 |
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| | | | श्लोक 6.59.146  | तस्मिन् प्रभग्ने त्रिदशेन्द्रशत्रौ
सुरासुरा भूतगणा दिशश्च।
ससागरा: सर्षिमहोरगाश्च
तथैव भूम्यम्बुचरा: प्रहृष्टा:॥ १४६॥ | | | | | | अनुवाद | | जब देवताओं के राजा इन्द्र का शत्रु रावण युद्धभूमि से भाग गया, तब देवता, दानव, भूत, दिशाएँ, समुद्र, ऋषि, बड़े-बड़े सर्प तथा थल-जलचर जीव भी उसकी पराजय को सोचकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। 146. | | | | When Ravana, the enemy of the King of Gods Indra, fled from the battlefield, the gods, demons, ghosts, directions, oceans, sages, big serpents, and terrestrial and aquatic creatures too became very happy thinking of his defeat. 146. | | | इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे एकोनषष्टितम: सर्ग:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें उनसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५९॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
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