स एवमुक्तो हतदर्पहर्षो
निकृत्तचाप: स हताश्वसूत:।
शरार्दितो भग्नमहाकिरीटो
विवेश लङ्कां सहसा स्म राजा॥ १४४॥
अनुवाद
भगवान राम की यह बात सुनकर राजा रावण ने अचानक लंका में प्रवेश किया। उसका हर्ष और अभिमान चूर-चूर हो गया, उसका धनुष कट गया, उसके घोड़े और सारथी मारे गए, उसका विशाल मुकुट टूट गया और वह स्वयं बाणों से अत्यंत पीड़ित हो गया।
Upon hearing Lord Rama say this, King Ravana suddenly entered Lanka. His joy and pride were shattered, his bow was cut off, his horses and charioteer were killed, his great crown was broken and he himself was greatly afflicted by arrows.