श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  6.59.139 
यो वज्रपाताशनिसंनिपाता-
न्न चुक्षुभे नापि चचाल राजा।
स रामबाणाभिहतो भृशार्त-
श्चचाल चापं च मुमोच वीर:॥ १३९॥
 
 
अनुवाद
वह परम वीर राजा रावण जो वज्र और अग्नि के प्रहारों से भी विचलित या विचलित नहीं होता था, वह भगवान राम के बाणों से घायल होकर अत्यंत व्याकुल और काँपने लगा और उसका धनुष उसके हाथ से गिर पड़ा॥139॥
 
That very brave king Ravana who was never agitated or shaken even by the blows of thunderbolts and fire, was then wounded by the arrows of Lord Rama and became extremely distressed and trembling and his bow fell from his hand.॥ 139॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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