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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना
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श्लोक 135
श्लोक
6.59.135
राक्षसेनाहवे तस्य ताडितस्यापि सायकै:।
स्वभावतेजोयुक्तस्य भूयस्तेजोऽभ्यवर्धत॥ १३५॥
अनुवाद
युद्धभूमि में राक्षस के बाणों से घायल होने पर भी स्वभावतः तेजस्वी हनुमान्जी अधिक पराक्रमी हो गए ॥135॥
Even after being wounded by the demon's arrows on the battlefield, Hanuman, who was naturally radiant, became more valorous. ॥135॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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