श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 133-134
 
 
श्लोक  6.59.133-134 
राघवस्य वच: श्रुत्वा राक्षसेन्द्रो महाबल:।
वायुपुत्रं महावेगं वहन्तं राघवं रणे॥ १३३॥
रोषेण महताऽऽविष्ट: पूर्ववैरमनुस्मरन्।
आजघान शरैर्दीप्तै: कालानलशिखोपमै:॥ १३४॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के ये वचन सुनकर महाबली राक्षसराज रावण अत्यन्त क्रोध से भर गया। उसे पूर्व वैर का स्मरण हो आया और उसने काली अग्नि की ज्वाला के समान तेजस्वी बाणों द्वारा युद्धस्थल में श्री रघुनाथजी के वाहन वायुपुत्र हनुमानजी को अत्यन्त घायल कर दिया।
 
On hearing these words of Shri Ram, the mighty demon king Ravana was filled with great anger. He remembered the previous enmity and with his arrows as radiant as the flame of black fire, he severely injured Hanuman, the son of Vayu, who was the vehicle of Shri Raghunath, on the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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