श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  6.59.132 
एतेन चात्यद्भुतदर्शनानि
शरैर्जनस्थानकृतालयानि।
चतुर्दशान्यात्तवरायुधानि
रक्ष:सहस्राणि निषूदितानि॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
रावण! तुम्हारे सामने खड़े हुए इस रघुवंशी राजकुमार ने अपने बाणों से जनस्थान के चौदह हजार राक्षसों को मार डाला था, जो अद्भुत और तेजस्वी योद्धा थे और उत्तम आयुधों से सुसज्जित थे।॥132॥
 
Ravana! This prince of the Raghuvanshi dynasty standing before you had killed with his arrows fourteen thousand demons of Janasthan, who were wonderful and spectacular warriors and were equipped with the best of weapons.'॥ 132॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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