श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  6.59.131 
यश्चैष शक्त्या निहतस्त्वयाद्य
गच्छन् विषादं सहसाभ्युपेत्य।
स एष रक्षोगणराज मृत्यु:
सपुत्रपौत्रस्य तवाद्य युद्धे॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
आज मैं युद्धभूमि में उस लक्ष्मण के अपमान का बदला लेने आया हूँ, जिसे तुमने युद्ध में जाते समय अपनी शक्ति से घायल कर दिया था और जो उस शक्ति के प्रहार से अचानक मूर्छित हो गया था। हे राक्षसराज! मैं अपने पुत्रों और पौत्रों सहित तुम्हारा काल बनकर आया हूँ॥131॥
 
Today I have come to the battlefield to take revenge for the insult of Lakshman whom you injured with your power while going to the war and who suddenly fell unconscious due to the blow of that power. O demon king, I have come along with my sons and grandsons as your death.॥ 131॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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