श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  6.59.130 
यदीन्द्रवैवस्वतभास्करान् वा
स्वयंभुवैश्वानरशंकरान् वा।
गमिष्यसि त्वं दशधा दिशो वा
तथापि मे नाद्य गतो विमोक्ष्यसे॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
‘यदि तू इन्द्र, यम, सूर्य, ब्रह्मा, अग्नि, शंकर अथवा दसों दिशाओं में से किसी के पास भी भाग जाए, तो भी अब मेरे हाथ से नहीं बच सकेगा ॥130॥
 
‘Even if you run to Indra, Yama or Surya, to Brahma, Agni or Shankar, or to any of the ten directions, you will not be able to escape from my hands now.॥ 130॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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