श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  6.59.129 
तिष्ठ तिष्ठ मम त्वं हि कृत्वा विप्रियमीदृशम्।
क्व नु राक्षसशार्दूल गत्वा मोक्षमवाप्स्यसि॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
हे राक्षसों में व्याघ्रस्वरूप रावण! तू चुपचाप खड़ा रह, चुपचाप खड़ा रह। मेरे विरुद्ध ऐसा अपराध करके तू अपने प्राणों के संकट से बचने के लिए कहाँ जाएगा?॥129॥
 
O Ravana, who is the tiger among the demons! Stand still, stand still. Where will you go to escape the danger to your life after committing such an offence against me?॥ 129॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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