श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  6.59.122 
आश्वस्तश्च विशल्यश्च लक्ष्मण: शत्रुसूदन:।
विष्णोर्भागममीमांस्यमात्मानं प्रत्यनुस्मरन्॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन लक्ष्मणजी भी भगवान विष्णु के अचिन्त्य रूप में अपने को चिन्तन करके स्वस्थ और निरोगी हो गए ॥122॥
 
Shatrusudan Lakshmanji also became healthy and diseased by thinking about himself in the unthinkable form of Lord Vishnu. 122॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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