श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.59.12 
नानापताकाध्वजछत्रजुष्टं
प्रासासिशूलायुधशस्त्रजुष्टम्।
कस्येदमक्षोभ्यमभीरुजुष्टं
सैन्यं महेन्द्रोपमनागजुष्टम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार की ध्वजाओं और छत्रों से सुशोभित, भालों, तलवारों और भालों आदि अस्त्रों से सुसज्जित, अजेय एवं निर्भय योद्धाओं से सेवित तथा महेन्द्र पर्वत के समान विशाल हाथियों से युक्त यह सेना किसकी है?॥12॥
 
Whose army is this that is adorned with various kinds of flags and umbrellas, equipped with weapons like lances, swords and spears, served by invincible and fearless warriors and filled with huge elephants like the Mahendra mountain?'॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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