श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 117-118h
 
 
श्लोक  6.59.117-118h 
विसंज्ञो मूर्च्छितश्चासीन्न च स्थानं समालभत्।
विसंज्ञं रावणं दृष्ट्वा समरे भीमविक्रमम्॥ ११७॥
ऋषयो वानराश्चैव नेदुर्देवाश्च सासुरा:।
 
 
अनुवाद
वह मूर्छित होकर गिर पड़ा और अपनी सुध-बुध खो बैठा। वहाँ भी वह शांत न रह सका - छटपटाता रहा और संघर्ष करता रहा। भयंकर और शक्तिशाली रावण को युद्धभूमि में मूर्छित देखकर ऋषि-मुनि, देवता, दानव और वानर हर्ष से जयजयकार करने लगे।
 
He fell unconscious and lost his senses. Even there he could not remain calm – he kept writhing and struggling. Seeing the fearsome and powerful Ravana unconscious in the battlefield, the sages, gods, demons and monkeys started shouting for joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)