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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  6.59.116 
आस्यैश्च नेत्रै: श्रवणै: पपात रुधिरं बहु।
विघूर्णमानो निश्चेष्टो रथोपस्थ उपाविशत्॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
उसके मुँह, आँखों और कानों से बहुत अधिक रक्त बहने लगा और वह इधर-उधर भटकता हुआ रथ के पिछले भाग में निश्चल होकर बैठ गया। 116.
 
A lot of blood began to flow from his mouth, eyes and ears, and he wandered around and sat down motionless in the rear part of the chariot. 116.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)