श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  6.59.114 
तत: क्रुद्धो वायुसुतो रावणं समभिद्रवत्।
आजघानोरसि क्रुद्धो वज्रकल्पेन मुष्टिना॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
इस समय वायुपुत्र हनुमान क्रोध से भरकर रावण की ओर दौड़े और अपने वज्र के समान घूंसे से उसकी छाती पर प्रहार किया।
 
At this time Hanuman, the son of Vayu, filled with rage ran towards Ravana and struck him on the chest with his thunderbolt-like punch.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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