श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  6.59.112 
शक्तॺा ब्राह्मॺा तु सौमित्रिस्ताडितोऽपि स्तनान्तरे।
विष्णोरमीमांस्यभागमात्मानं प्रत्यनुस्मरत् ॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा की शक्ति से वक्षस्थल पर प्रहार होने के बाद भी लक्ष्मण स्वयं को भगवान विष्णु का अकल्पनीय अंश मानते रहे।
 
Even after being struck in the chest by Brahma's power, Lakshmana continued to contemplate himself as the inconceivable part of Lord Vishnu. 112.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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