श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  6.59.111 
हिमवान् मन्दरो मेरुस्त्रैलोक्यं वा सहामरै:।
शक्यं भुजाभ्यामुद्धर्तुं न शक्यो भरतानुज:॥ १११॥
 
 
अनुवाद
जो रावण अपनी भुजाओं से देवताओं सहित हिमालय, मंदराचल, मेरुगिरि अथवा तीनों लोकों को उठाने की शक्ति रखता था, वह भरत के छोटे भाई लक्ष्मण को भी नहीं उठा सका ॥111॥
 
Ravana, who had the power to lift the Himalayas, Mandarachal, Merugiri or the three worlds along with the gods with his arms, was not able to lift Bharat's younger brother Lakshman. 111॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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