श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  6.59.107 
स कृत्तचाप: शरताडितश्च
मेदार्द्रगात्रो रुधिरावसिक्त:।
जग्राह शक्तिं स्वयमुग्रशक्ति:
स्वयंभुदत्तां युधि देवशत्रु:॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
जब धनुष कट गया और बाणों से उसे गहरी चोटें लगीं, तब रावण का सारा शरीर चर्बी और रक्त से लथपथ हो गया। उस अवस्था में देवताओं का शत्रु वह महाबलशाली राक्षस युद्धभूमि में ब्रह्माजी द्वारा दी गई शक्ति लेकर युद्ध करने लगा॥107॥
 
When the bow was cut and he suffered deep wounds from the arrows, then the whole body of Ravana was soaked in fat and blood. In that condition, that terribly powerful demon who was the enemy of the gods, took the power given by Lord Brahma on the battlefield.॥ 107॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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