श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  6.59.103 
स लक्ष्मणश्चापि शिताञ्शिताग्रान्
महेन्द्रतुल्योऽशनिभीमवेगान्।
संधाय चापे ज्वलनप्रकाशान्
ससर्ज रक्षोधिपतेर्वधाय॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के राजा इन्द्र के समान पराक्रमी लक्ष्मण ने भी रावण के वध के लिए अपने धनुष पर अग्नि के समान चमकने वाले तथा वज्र के समान वेग वाले तीखे बाण चढ़ाये।
 
Lakshmana, who was as mighty as the king of gods Indra, also placed on his bow sharp arrows, which were shining like fire, having the speed of thunderbolts, for the killing of Ravana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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