श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.59.10 
ततो नगर्या: सहसा महौजा
निष्क्रम्य तद् वानरसैन्यमुग्रम्।
महार्णवाभ्रस्तनितं ददर्श
समुद्यतं पादपशैलहस्तम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाबली रावण अचानक लंका से निकला और उसने देखा कि भयंकर वानर सेना समुद्र और बादलों के समान गर्जना करती हुई तथा हाथों में पर्वत शिखर और वृक्ष लिए हुए युद्ध के लिए तैयार खड़ी है।
 
The mighty Ravana suddenly emerged from Lanka and saw the fearsome monkey army roaring like the ocean and the clouds and standing ready for battle holding mountain peaks and trees in their hands.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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