श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.59.1 
तस्मिन् हते राक्षससैन्यपाले
प्लवंगमानामृषभेण युद्धे।
भीमायुधं सागरवेगतुल्यं
विदुद्रुवे राक्षसराजसैन्यम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब रणभूमि में वानरों में श्रेष्ठ नील ने दैत्य सेनापति प्रहस्त को मार डाला, तब समुद्र के समान वेगवान और भयंकर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित उस दैत्यराज की सेना भाग गई॥1॥
 
After the demon commander Prahastha was killed in the battlefield by Neela, the best of the monkeys, that demon king's army, swift as the ocean and equipped with terrible weapons, fled away. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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