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श्लोक 6.58.54  |
नीलेन कपिमुख्येन विमुक्ता महती शिला।
बिभेद बहुधा घोरा प्रहस्तस्य शिरस्तदा॥ ५४॥ |
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| अनुवाद |
| महाकपि-पुरुष नीलक द्वारा फेंकी गई उस विशाल एवं भयानक चट्टान ने प्रहस्त के सिर को कुचलकर उसके कई टुकड़े कर दिए। |
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| That huge and terrible rock thrown by the great ape-man Neelaka crushed the head of Prahasta and broke it into several pieces. 54. |
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