श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.58.44 
ततो रोषपरीतात्मा धनुस्तस्य दुरात्मन:।
बभञ्ज तरसा नीलो ननाद च पुन: पुन:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए नील ने उस दुष्टात्मा का धनुष बड़े जोर से तोड़ दिया और बारम्बार गर्जना करने लगा ॥44॥
 
Thereafter Neel, filled with rage, broke the bow of that evil soul with great force and began roaring repeatedly. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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