श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.58.22 
जाम्बवांस्तु सुसंक्रुद्ध: प्रगृह्य महतीं शिलाम्।
पातयामास तेजस्वी महानादस्य वक्षसि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाप्रतापी जाम्बवन्त ने अत्यन्त क्रोधित होकर एक विशाल एवं भारी शिला उठाकर महानद की छाती पर दे मारी।
 
Thereafter the illustrious Jāmbavana became very angry, picked up a huge and heavy rock and threw it on Mahanada's chest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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