श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.58.16 
वज्रस्पर्शतलैर्हस्तैर्मुष्टिभिश्च हता भृशम्।
वमन् शोणितमास्येभ्यो विशीर्णदशनेक्षणा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वानरों के वज्र के समान थपेड़ों और घूँसों से राक्षस बुरी तरह से पीडि़त हो गए और उनके मुँह से रक्त की उल्टी होने लगी। उनके दाँत और आँखें टूटकर बिखर गईं॥16॥
 
The demons were thoroughly beaten by the monkeys' thunderbolt-like slaps and punches and started vomiting blood from their mouths. Their teeth and eyes were shattered and scattered.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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