श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.58.10 
तेषामन्योन्यमासाद्य संग्राम: सुमहानभूत्।
बहूनामश्मवृष्टिं च शरवर्षं च वर्षताम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दोनों पक्षों के असंख्य योद्धाओं में पत्थरों और बाणों की वर्षा के साथ घोर युद्ध छिड़ गया॥10॥
 
Then a huge battle broke out between the numerous warriors of both the sides, with a shower of stones and arrows.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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