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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध
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श्लोक 1
श्लोक
6.58.1
तत: प्रहस्तं निर्यान्तं दृष्ट्वा रणकृतोद्यमम्।
उवाच सस्मितं रामो विभीषणमरिंदम:॥ १॥
अनुवाद
(इसके पहले) प्रहस्त को युद्ध की तैयारी करते और लंका से बाहर आते देख शत्रु श्री रामचन्द्र जी मुस्कुराए और विभीषण से बोले- ॥1॥
(Before this) seeing Prahastha preparing for war and coming out of Lanka, enemy Shri Ramchandra ji smiled and said to Vibhishana - ॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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