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ramayan 6.57.4: लंकापुरी चारों ओर से शत्रुओं से घिर गई थी। यह देखकर राक्षसराज रावण ने अपने हितैषी, युद्धकला में निपुण प्रहस्त से यह समयोचित बात कही-॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.57.4 
रुद्धां तु नगरीं दृष्ट्वा रावणो राक्षसेश्वर:।
उवाचात्महितं काले प्रहस्तं युद्धकोविदम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
लंकापुरी चारों ओर से शत्रुओं से घिर गई थी। यह देखकर राक्षसराज रावण ने अपने हितैषी, युद्धकला में निपुण प्रहस्त से यह समयोचित बात कही-॥4॥
 
Lankapuri was surrounded by enemies from all sides. Seeing this, the demon king Ravana said this timely thing to his well-wisher, expert in the art of war, Prahasta -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)